बुंदेलखंड में कृषि का "शोध" करेगा उद्धार, करना होगा आगाज

banda

विनोद मिश्रा
बांदा।
कृषि में शोध कार्यों से ही बुंदेलखंड का कल्याण होगा। उन्नतिशील बीज ही किसानों पर उपकार करेंगे। उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद, लखनऊ (उपकार) महानिदेशक डॉ. संजय सिंह यह मूल मंत्र बताया। वह यहां कृषि विश्वविद्यालय आये थे। उन्होंने  कृषि विश्व विद्यालय में ज्यादा से ज्यादा शोध कार्य बढ़ानें पर जोर दिया। उन्होंने प्राकृतिक खेती, सह फसली खेती, कृषि व उद्यान वानिकी समेत किसान हितैषी परियोजनाओं का प्रस्ताव तैयार करने की बात भी कही।

महानिदेशक अनुसंधान परिषद द्वारा वित्त पोषित परियोजनाओं के अर्द्ध वार्षिक मूल्यांकन एवं समीक्षा कार्यशाला में शामिल होने आए थे। उन्होंने यहां आईएफएस मॉडल, बीज उत्पादन, पौधशाला समेत अन्य शोध कार्यों को देखा। कुलपति डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने विश्व विद्यालय में शोध की संभावनाओं को बताया। निदेशक प्रसार डॉ. एनके बाजपेयी ने बताया कि उपकार के सहयोग से यहां 5 परियोजनाएं संचालित हैं। इनके प्रधान अन्वेषकों डॉ.एके श्रीवास्तव, डॉ. चंद्रमोहन सिंह, डॉ. कमालुद्दीन, डॉ. आरके सिंह, डॉ. हितेश कुमार, डॉ. बीएस राजपूत ने अपने प्रस्तुतिकरण दिए। उपकार के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बीके तिवारी ने समीक्षा की। सह निदेशक शोध डॉ. एसी मिश्रा ने विश्व विद्यालय के शोध कार्य में और भी सार्थक प्रयास करने की बात कही।

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