आसमान ने उगली तबाही : पृथ्वी पर बर्बादी का मंजर, रेड एलर्ट का अलार्म!

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विनोद मिश्रा
बांदा।
बांदा समेत में रविवार को आफत बरसी। बीते चार दिन से बारिश तो हो ही रही थी, रविवार रात ओलावृष्टि ने किसानों पर कहर बरपा दिया। एक घंटे तक लगातार मूसलाधार बारिश और ओलों की वजह से रबी की फसलों को भारी नुकसान हुआ। खेतों में सरसों, चना, मटर व मसूर की पौध बिछ गई। नुकसान का सही आकलन बारिश बंद होने के बाद होगा। जगह जगह पक्षी भी मरे मिले।
बांदा में बीते 24 घंटे में औसत 30 और चार दिनों में 103 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई है। शीतकाल में पिछले एक दशक में यह सर्वाधिक है। यहां शनिवार और रविवार को पूरा दिन गरज और चमक के साथ बारिश होती रही। बीच बीच में कई बार ओले भी गिरे। मौसम विभाग ने रविवार को अलर्ट जारी किया ।
बांदा में नरैनी, तिंदवारी, करतल, जसपुरा, अतर्रा, मटौंध, ओरन, पैलानी आदि क्षेत्रों में देर तक ओले गिरे। कई जगह खेतों में बर्फ की सफेद परत जम गई। सरसों, अरहर, मसूर, मटर के फूल गिर गए। किसानों में हाय तौबा मच गई। अतर्रा क्षेत्र के पचोखर, तेंदुही, रहूसत, गड़ांव, महोतरा, नगनेधी, खुरहंड में फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। बडोखर के कनवारा बरूवा डेरा में सरसों, चना, मटर पूरी फसल पूरी तरह नष्ट है।
तिंदवारी के गुगौली, भिड़ौरा, पलरा, बंबिया सहित दो दर्जन से अधिक गांवों की मटर, गेहूं, चना, मसूर फसल नष्ट हो गई। कतरल क्षेत्र के बिल्हरका गांव के किसान अशेाक व फूल सिंह, बाबूपाल, बिल्लू सिंह, भैयाराम ने बताया कि तीन दर्जन गांवों की रबी की फसल खराब हो गई है।
मटौंध क्षेत्र के कहरा, बहिंगा, सिरसी, कुलकुआं, बरबई आदि गांवों में ओलावृष्टि से रबी की फसलें बर्बाद हो गई है।
शहरी व ग्रामीण जनजीवन अस्त व्यस्त है। गलियों में जलभराव व कीचड़ होने से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। बारिश थमने के इंतजार में लोग घरों में बैठे रहे। बारिश रुकने पर लोगों ने जरूरी काम निपटाया।
पारा गिर जाने और मौसम में नमी 80 फीसदी से ज्यादा हो जाने से गलन और बढ़ गई।

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