श्रापित पहाड़ पर नवरात्र में आती हैं विंध्यवासिनी!

 
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विनोद मिश्रा
बांदा।
बुंदेलखंड के बांदा जनपद के खत्री पहाड़ पर मां विंध्यवासिनी के विराजमान होने की पौराणिक मान्यता की किंवदंती है। देवी का भार सहन करने में असमर्थता जाहिर करने पर देवी मां ने पहाड़ को 'कोढ़ी' होने का श्राप दिया था। पहाड़ के उद्धार के लिए नवरात्र में देवी मां सिर्फ एक दिन ही यहां विराजमान होती हैं।

गिरवां थाना क्षेत्र के इलाके में स्योढ़ा गांव के खत्री पहाड़ की चोटी पर मां विंध्यवासिनी का मंदिर है। यहां नवरात्र के अवसर पर प्रसिद्ध मेला लगता है। दूर- दराज से लोग मुंडन के अलावा अन्य मन्नतें पूरी होने पर ध्वजा-नारियल का चढ़ावा चढ़ाने आते हैं।

देवी मां श्रापित सफेद पहाड़ पर विराजमान होने की पौराणिक है कि देवी मां के श्राप से यह पहाड़ 'कोढ़ी' यानी सफेद हो गया है।

मां विंध्यवासिनी मिर्जापुर में विराजमान होने से पहले इस खत्री पहाड़ पर ही आई थीं, लेकिन पहाड़ ने उनका भार सहन करने में असमर्थता व्यक्त की, जिससे उन्होंने पहाड़ को कुष्ठ रोगी होने का श्राप दे दिया। तभी से पहाड़ की पूरी चट्टानें सफेद हैं।

देवी मां के श्राप से घबराया पहाड़  श्राप वापस लेने की विनती की तो मां ने उसके उद्धार के लिए नवरात्र में अष्टमी तिथि को मिर्जापुर मंदिर का आसन (स्थान) त्याग कर यहां आने का वचन दिया था। यही वजह है कि अष्टमी को यहां लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है।

नवरात्र में अन्य तिथियों की अपेक्षा अष्टमी की तड़के से ही मां की प्रतिमा में अजीब सी चमक प्रतीत होती है। भक्तो की अष्टमी संख्या लाख पार कर जाती है।श्रद्धाभाव से आए हर श्रद्धालु की मुराद पूरी होती है।

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