तीन काले कृषि कानून वापिस होना, नरेंद्र मोदी की हार है और किसानों की जीत: सचिन चौधरी

 
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मुरादाबाद। शुक्रवार को देव दिवाली पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र संबोधन के दौरान तीनों कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने का ऐलान किया तो देश प्रदेश की राजनीति में हलचल मिल गई। भारतीय किसान यूनियन ने अपने आंदोलन को जहां अभी वापस लेने से इनकार किया है वहीं कांग्रेस ने कहा है कि भाजपा जा रही है इसीलिए सत्ता जाने के डर से भाजपा ने तीनों कानूनों को वापस किया लेकिन इस सरकार के हाथ 700 किसानों के खून से सने हैं और इसका हिसाब भाजपा को देना ही होगा।

शुक्रवार को उत्तर प्रदेश कांग्रेस के महासचिव सचिन चौधरी ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया और उन्होंने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा केंद्र में बैठी भाजपा की तानशाह सरकार को आखिर देश के अन्नदाताओं के आगे झुकना ही पड़ा है। नरेंद्र मोदी का घमंड और अहंकार खुलेआम चकनाचूर हुआ है और देश की किसानी की जीत हुई है। नरेंद्र मोदी जी पिछले 1 साल में किसानों के दिल की बात समझ नहीं पाये बड़े ताज्जुब की बात कि आज एक साल बाद किसानों की 600 से ज्यादा शहादतों, ठंड, बारिश, धूप गर्मी के बाद भी समझ नहीं पाये तो इसका मतलब उनकी समझ में भारी कमी है। 

इतना समय लग गया नरेंद मोदी को यह समझने में की यह काले कानून है ना कि कृषि कानून इसका मतलब देश में भुखमरी, भ्रष्टाचार, गरीबी को तो शायद समझ ही नहीं पाएंगे। 2022 के विधानसभा चुनावों में उत्तरप्रदेश की जनता भाजपा के घमंडी शासक को करारा जवाब देगी क्योंकि अबतक देश का किसान खालिस्तानी थे, आतंकवादी थे, आंदोलनजीवी थे अब अचानक से किसान हो गए। भाजपा का दोगलापन, नकारापन को अब ठिकाने लगाने का समय आ गया है। आज हिटलर शाही की करारी हार हुई है देश का लोकतंत्र जीता है अब हमें देश के लोकतंत्र पर तानशाह को हावी नहीं होने देना है , देश में लोकतंत्र की सदैव बहाली बनाये रखने के लिए आगे आना होगा। यह देश के किसानों का आंदोलन था और किसान देश की नींव हैं, लोकतंत्र के स्तम्भ हैं इनको डराया नहीं जा सकता,कुचला नहीं जा सकता भाजपा को इसका परिणाम 2022 में मिल जाएगा, भाजपा का सूपड़ा साफ होना तय है।

 

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