जंगल जल रहे, सांसें रुक रहीं: उत्तराखंड में जंगलों की आग से भयानक प्रदूषण, सांस लेना मुश्किल

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जंगल जल रहे, सांसें रुक रहीं: उत्तराखंड में जंगलों की आग से भयानक प्रदूषण, सांस लेना मुश्किल

forest fire air pollution


देहरादून (उत्तराखंड) : बीते दस दिन से जब से वनाग्नि की घटनाएं बढ़ी हैं, वहां ब्लैक कार्बन की मात्रा बढ़ी है। पहले जहां दो माइक्रोग्राम तक कार्बन मिलता था, सोमवार को उसकी मात्रा 16 माइक्रोग्राम तक पहुंच गई।

उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग पहाड़ की आबोहवा को भी प्रदूषित कर रही है। बीते 10 दिनों में पहाड़ के वातावरण में कार्बन की मात्रा में आठ गुना तक का इजाफा हुआ है। ये चिंताजनक तथ्य दून विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग द्वारा चमोली जिले में किए जा रहे शोध में सामने आए हैं।
 
दून विवि के पर्यावरण विभाग के प्रोफेसर डॉ.विजय श्रीधर ने बताया कि विवि के शोधार्थियों की एक टीम चमोली के थराली स्थित प्राणमति बेसिन में वायु गुणवत्ता और ब्लैक कार्बन को लेकर शोध कर रही है। इसके तहत हवा में ब्लैक कार्बन और अन्य प्रदूषित तत्व की मात्रा प्रतिदिन मापी जा रही है।

उन्होंने कहा कि बीते दस दिन से जब से वनाग्नि की घटनाएं बढ़ी हैं, वहां ब्लैक कार्बन की मात्रा बढ़ी है। पहले जहां दो माइक्रोग्राम तक कार्बन मिलता था, सोमवार को उसकी मात्रा 16 माइक्रोग्राम तक पहुंच गई। इससे पता चला कि इसमें सोमवार को बायोमास जलने से पैदा हुए कार्बन की मात्रा सौ प्रतिशत तक थी। यानी जो भी ब्लैक कार्बन हवा में मिला वो जंगलों की आग की वजह से था। इसे लेकर विस्तृत शोध जारी है।

वाहनों से और बढ़ेगा प्रदूषण

प्रो.विजय श्रीधर के अनुसार, चारधाम यात्रा के चलते वाहनों का दबाव बढ़ने से क्षेत्र में ब्लैक कार्बन बढ़ेगा। मंगलवार को जो ब्लैक कार्बन पाया गया, उसमें बायोमास 50 था। इसका मतलब जंगलों की आग से 50 ब्लैक कार्बन मिला जबकि बाकी कार्बन वाहनों के धुएं या अन्य कारणों से आया। ऐसे में वाहनों का दबाव बढ़ने से पहाड़ों पर ब्लैक कार्बन की मात्रा और बढ़ने की आशंका है।

ऋषिकेश तक असर

जंगलों की आग का प्रभाव ऋषिकेश और काशीपुर तक पड़ रहा है। सीपीसीबी की वेबसाइट के मुताबिक, सात मई को ऋषिकेश में एक्यूआई 174 दर्ज किया गया। जो छह मई को 159 था। वहीं काशीपुर में छह मई को एक्यूआई 109 जो सात मई को दागुना 216 हो गया।